चारों धाम
फुरसत कहां है किसी को, करना सभी को काम है
कर्म से ही पहचान हमारी, कर्म से ही अपना नाम है
कर्म ही मनुष्य की कीमत है बिना कर्म सब बेनाम है,
आराम करने वालों का जीवन होना इक दिन हराम है
राम राम को खोजते हैं सभी, सबके दिल बसे राम है
मन का मन्दिर अगर साफ हो तो मन ही चारों धाम है
चाहे बोलो सीताराम राधेश्याम चाहे बोलो घनश्याम रे,
भजते हैं हम जिनके नाम अनेकों वही हमारे श्री राम है,
✍️ सन्दीप शाश्वत
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