संदेश

यार

रौशनी इतनी ना सूरज पे होगी, ना ही चांद पे और ना ही सितारों पे कि जितनी रौशन महफ़िल सजाई है मिलकर हम सभी यारों ने ✍️ सन्दीप शाश्वत

शायरी

यारों हम तो उनकी याद में शायरी लिखकर जिंदगी गुजार रहे हैं उन्हें क्या कहें उन्हें शर्मिंदगी ही नहीं वो तो वाह वाह कर रहे हैं हे खुदा ऐसी महबूब की ऐसी मोहब्बत में यूं बर्बाद हुए है कि, इधर वो अपनो के संग जिये जा रहें हैं और इधर हम मरे जा रहे हैं ✍️ सन्दीप शाश्वत

जन्मदिन की दुआं

कितना खुशनसीब है वो जिसे लम्बी उम्र की तुम दुआं देने गये और हमारे जन्मदिन पे तो तुमने हमें कोई बदुआं भी नहीं दी ✍️ सन्दीप शाश्वत

अजीब

बहुत ही अजीब प्यार था उसका यारों, हमें बिना मयस्सर ही मुक्कमल हो गया हाय इस बद-नसीबी को कैसे सहें हम, वो गुल मेरे बिन छुए ही कंवल हो गया ✍️सन्दीप शाश्वत

गर मिले फुर्सत

" अगर मिले फुर्सत तो कभी बात भी कर लिया करो, हम अच्छे ना सही पर हम इतने बुरे भी तो नहीं है.." ✍️ सन्दीप फतेहपुरी

चारों धाम

फुरसत कहां है किसी को, करना सभी को काम है कर्म से ही पहचान हमारी, कर्म से ही अपना नाम है कर्म ही मनुष्य की कीमत है बिना कर्म सब बेनाम है, आराम करने वालों का जीवन होना इक दिन हराम है राम राम को खोजते हैं सभी, सबके दिल बसे राम है मन का मन्दिर अगर साफ हो तो मन ही चारों धाम है चाहे बोलो सीताराम राधेश्याम चाहे बोलो घनश्याम रे, भजते हैं हम जिनके नाम अनेकों वही हमारे श्री राम है, ✍️ सन्दीप शाश्वत

तराना

तुम्हारी याद आती है तो हम सोना भूल जाते हैं तुम जब साथ होती हो तो हम रोना भूल जाते हैं लिखते तो हम हर रोज हैं कुछ प्यार के नगमें, मगर तुमसे जब बात होती है तो गाना भूल जाते हैं ✍️ सन्दीप शाश्वत