शायरी
यारों हम तो उनकी याद में शायरी लिखकर जिंदगी गुजार रहे हैं
उन्हें क्या कहें उन्हें शर्मिंदगी ही नहीं वो तो वाह वाह कर रहे हैं
हे खुदा ऐसी महबूब की ऐसी मोहब्बत में यूं बर्बाद हुए है कि,
इधर वो अपनो के संग जिये जा रहें हैं और इधर हम मरे जा रहे हैं
✍️ सन्दीप शाश्वत
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