शहर - जहर

 वो पल कितना हसीं था जब मिलने उसके शहर गया था

हाय उसने मुझ पे मोहब्बत का ऐसा कहर ढाया था

आज भी याद है मुझे उसकी अदाओं का सितम ,

यारों हमने भी कभी मोहब्बत का जहर पीया था


✍️सन्दीप शाश्वत

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