पहला प्यार
तुम्हें आंखों में बसाया है तुम्हें ही दिल में बसाया है
तुम्हारे सिवा मेरी बाहों में कभी कोई ना आया है
मोहब्बत में ये वफ़ाएं क्या मैंने कुछ कम निभाया है
सारी दुनिया में मैने इक तुम्हें ही अपना बनाया है
तुम्हें आंखों में बसाया है तुम्हें ही दिल में बसाया है
बनाने वाले ने हमें भी पर तुम्हें फुरसत से बनाया है
लबों से लब की कुछ बातें करने को तुमसे ए जानां
बातों ही बातों में कई दफा रात को दिन दिन को रात बनाया है
तुम्हें आंखों में बसाया है तुम्हें ही दिल में बसाया है
मैं भूल ना जाऊं कहीं काम में इसलिए तुम्हें सांसों में बसाया है
सुख में हो या दुःख हो,चाहे ख़्वाब हो या हकीकत हो ,
हजारों सपनों में हा मैंने तुमको रानी खुद को राजा पाया है
तुम्हें आंखों में बसाया है तुम्हें ही दिल में बसाया है
तुम्हीं ने हसना सिखाया है तुम्हीं ने रोना सिखाया है
तुम्हारे पास थे जब खुश थे मगर फिर भी ना मिल पाये
इन्हीं यादों में डूब कर आज हमको रोना आया है
✍️- सन्दीप शाश्वत
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें